Mysore Dasara मैसूर दशहरा उत्‍सव की मशहूर जम्‍बो सवारी के हाथी | Jamboo Savari Elephants

Mysore Dasara Jamboo Savari Elephants मैसूर दशहरे में इस बार 9 हाथी जंबो सवारी में भाग लेने के लिए मैसूर के शाही महल पहुंच चुके हैं। दो साल के अंतराल के बाद, वीरानहोसहल्ली Veeranahosahalli से लोक मंडलों के साथ आधा किलोमीटर का मार्च कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसने आधिकारिक तौर पर मैसूर दशहरा उत्सव 2022 की शुरुआत भी कर दी।

स्वर्ण हौदा ले जाने वाले अभिमन्यु के नेतृत्व में नौ बंदी हाथी रविवार (7 अगस्त) को विभिन्न हाथी शिविरों से मैसूर पैलेस (Mysore Palace) तक अपनी यात्रा ‘गजपायण’ पर निकले। हाथी सोमवार (8 अगस्त) को शाम 4 बजे मैसूर के अशोकपुरम में अरण्य भवन पहुंचे और बुधवार (10 अगस्त) तक अरण्य भवन में रहे।

अभिमन्यु के नेतृत्व में आए 9 हाथी

नौ दशहरा हाथी Jamboo Savari Elephants जो पहले जत्थे का हिस्सा थे, उनमें 57 वर्षीय अभिमन्यु, 22 वर्षीय भीमा, 39 वर्षीय गोपालस्वामी और मथिगोडु हाथी शिविर के 39 वर्षीय महेंद्र, 63 वर्षीय अर्जुन, बल्ले हाथी शिविर से 44 वर्षीय धनंजय और दुबारे हाथी शिविर से 45 वर्षीय कावेरी, 49 वर्षीय चैत्रा और रामपुरा हाथी शिविर से 21 वर्षीय लक्ष्मी शामिल हैं।

गजपायण मैसूर दशहरा (Mysore Dasara) की औपचारिक शुरुआत

हाथियों का गजपायण मैसूर दशहरा (Mysore Dasara) उत्सव की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। हाथियों की यात्रा के पूरे रास्ते में ढोल नगाड़े और पारंपरिक आदिवासी वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं और लोग हाथियों को गुड़, फल और मिठाई खिलाते हैं। बताया जाता है कि पुराने समय में गजपायण से ही लोगों को यह जानकारी मिलती थी कि मैसूर दशहरे (Mysore Dasara) का आयोजन होने वाला है।

डेढ़ महीने तक हाथी लेंगे जंबू सवारी का प्रशिक्षण

अब करीब डेढ़ महीने तक ये हाथी महल में शाही मेहमान बन कर रहेंगे और इनकी रोज खूब आवभगत होगी। आम तौर इस दौरान सभी हाथियों का वजन काफी बढ़ जाता है। लेकिन इस बीच इन्हें शाही महल से बन्नी मंटप तक रोज उसी मार्ग से गुजारा जाएगा जहां से अंतिम दिन जम्बू सवारी निकलेगी। इसे हाथियों का प्रशिक्षण कहा जाता है।

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