Mysore Dasara 2 साल बाद अपने शाही अंदाज में लौट रहा आयोजन

लगभग दो साल के बाद इस बार साल 2022 में मैसूरु दशहरा (Mysore Dasara) महोत्सव का पुराने अंदाज मं आयोजन हो रहा है। कोरोना महामारी के कारण उपजी परिस्थितियों में लागू कोविड प्रोटोकाल के चलते कर्नाटक सरकार ने साल 2020 और 2021 में मैसूर दशहरा (Mysore Dasara) महोत्सव को पारंपरिक तरीके से लेकिन बेहद सादगी से मनाने का फैसला किया। सभी अनुष्ठान और समारोह COVID-19 दिशानिर्देशों का पालन करते हुए किए गए। इसका तात्पर्य यह है कि सार्वजनिक भागीदारी नहीं हुई और जंबो सवारी जैसे आयोजन केवल सांंकेतिक तरीके से महल परिसर में ही किए गए।

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मैसूर दशहरे (Mysore Dasara) का आयोजन कब से?

मैसूर दशहरा (Mysore Dasara) महोत्सव इस समय शहर में आने वाले सभी पर्यटकों के लिए एक व्यापक अनुभव है। इस साल 26 सितंबर से 5 अक्टूबर तक आयोजन होगा। हालांकि काेरोना महामारी (Corona Pandemic) का खतरा अभी तक खत्म नहीं हुआ है और राज्य में लगातार नए मरीज मिलने का सिलसिला भी जारी है इसके बावजूद कर्नाटक सरकार ने इस बार दो साल के बाद मैसूर दशहरे का आयोजन इसकी पारंपरिक भव्यता के साथ करने का निर्णय किया है।

जंबो सवारी (Jambo Savari) अंबा विलास महल से बन्नी मंटप तक

यानि, इस बार साल 2022 में जंबो सवारी (Jambo Savari) महल से बन्नी मंटप (Banni Mantapa) तक निकलेगी और विजयादशमी (Dashahara) पर पारंपरिक शोभायात्रा का आयोजन भी होगा। इसके अलावा अन्य सभी आयोजनों को भी पूरी जनभागीदारी के साथ करने का निर्णय किया गया है। हालांकि, यह देखने वाली बात होगी कि सरकार का यह फैसला कितना सही है और क्‍या इस आयोजन से बीमारी को एक बार फिर सिर उठाने का मौका मिलेगा?

पर्यटन उद्योग को बचाने का प्रयास

कर्नाटक सरकार ने इस बार नाड हब्बा (Nad Habba) यानि सार्वजनिक उत्सव को रीब्रांड करने का निर्णय लिया है। मैसूर दशहरा (Mysore Dasara) राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने का एक प्रभावशाली माध्यम रहा है इसलिए सरकार एक बार फिर पर्यटन को संजवनी देने का प्रयास कर रही है। सत्कार उद्योग और पर्यटन को पिछले दो साल में सबसे ज्यादा मार झेलनी पड़ी थी।

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