अफगानिस्‍तान का पतन और विश्‍व

अफगानिस्‍तान पर #Talibans के कब्‍जे को लेकर सब #American को गाली दे रहे हैं। सवाल ये उठता है कि अमेरिकी उनकी हिफाजत कब तक कर सकते थे? इतने सालों से ट्रेनिंग और हथियार मिलने के बावजूद लड़ना नहीं सीखे, अपनी सुरक्षा खुद करना नहीं सीखे तो इसमें किसकी गलती है?

क्‍या अमेरिका अनंत काल तक उनकी हिफाजत करने वाला था? और #Afganistan के नाकारा राजनेताओं को कोई कुछ क्‍यों नहीं कह रहा, जिन्‍होंने खैरात में मिली आजादी का सुख भोगा लेकिन देश को उठा कर अपने पैरों पर खड़ा नहीं कर सके और अब तालिबानों को सत्ता सौंपने जा रहे हैं। ऐसे शासकों को गुलामी ही करनी चाहिए…

भारत को इस मामले में आगे जाने की जरूरत क्‍यों है? जितनी मदद कर सकते थे की, लेकिन अब वहां जो हो रहा है, उसके लिए #Afganistan खुद जिम्‍मेदार है। अपनी रक्षा करना नहीं सीखे तो अब गुलामी ही करनी पड़ेगी। #बाइडेन का सेना वापस बुलाने का फैसला सही था। कभी तो अंत होना ही था, सो हो गया।

इससे पता चलता है कि अमेरिकियों ने अफगानियों को सही तरह से ट्रेन्‍ड ही नहीं किया। शर्मनाक तरीके से बिना लड़े ही सरेंडर कर दिया। या फिर इनको लगता था कि अंकल सैम जिंदगी भर उनके सिक्‍यूरिटी गार्ड बन कर बैठेंगे? अपनी हिफाजत करना नहीं सीखे तो अब भुगते!!! #talibantakeover

तालिबान का कब्‍जा होने के बाद लोग देश छोड़ कर भाग रहे हैं। हवाई जहाज में जगह नहीं मिलने पर उसके टायर और दरवाजे पकड़ कर लटकते लोगों को देखें.. हवा में उड़ते जहाज से लोग पके आम की तरह टपक कर जमीन पर गिरते दिखेंगे। यह नया अफगानिस्‍तान बन रहा है। सोचना होगा कि इंसान आखिर चाहता क्‍या है ….



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