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नानी, गाँधी, चरखा और मेरी बेटी…

मेरी नानी चरखा कातती थीं। मेरी माँ ने मुझे और मेरे भाई को दिखाने के लिए चरखा काता। मैंने भी हाथ आजमाने की कोशिश की लेकिन उम्र में छोटा होने …

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बदलने की बारी अब जनता की

केंद्र सरकार के एक फैसले से पूरा देश कतार में खड़े होने पर मजबूर हो गया। दो सप्‍ताह होने को आए लेकिन हालात सुधरने का नाम लेते नजर नहीं आ …

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संजय उवाच… जो भी जैसा मैंने देखा

हमारे इर्द गिर्द रोज बहुत कुछ घट रहा है और इन सबका असर हमारी जिंदगी पर भी होता है। मैंने हमेशा से इन घटनाओं पर अपने विचार बेबाकी से रखने …

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